चाँद फिर निकला Written By: Kamlesh Chauhan Copyright@ July 9th, 2008

चिंतन मेरे मन का ये चाँद आज फिर निकला है यु सज धज के मुहबत का जिक्र हो शायद हाथो की लकीरों मे याद दिलाता है मुझे एक अनजान राही की याद दिलाता है उन मुहबत भरी बातो की टूट कर चाहा इक रात दिल ने एक बेगाने को कबूल कर लिया था उसकी रस भरी बातो को वोह पास हो कर भी दूर है मुझ... [पूरी पोस्ट]
writer Gauri
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[02 Nov 2009 04:06 AM]

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