सालम आदमी को बेच देता है वह आदमी

विचार करने के लिए कुछ विचार नजीर के कलाम 'यां आदमी पे जान को वारे है आदमी और आदमी पे तेग को मारे है आदमी...’ की तरह ही तो दिखता है वह। आता है, चाय-नाश्ता-भोजन करता है, इंसानियत के रिश्ते गांठता है, चकाचौंध व ग्लैमर भरी जिंदगी के सपने दिखाता है और आखिर में सालम आदमी को बेच देता... [पूरी पोस्ट]
writer Kaushal
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[02 Nov 2009 04:03 AM]

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