आ गई कुछ यादें चुपके से...

मन पखेरू फ़िर उड़ चला यूँ हीं आई जब याद बात कोई तो कागज़ पर कलम फ़िर चल पड़ी.... आधी बात कही थी तुमने और आधी मैने भी जोड़ी तब जाकर बनी तस्वीर सच्ची-झूठी थोड़ी-थोड़ी नटखट सी बातों के पीछे दुनिया भर का प्यार छुपा मुस्काती आँखो ने भी जाने कितने स्वप्न दिखा लूटा था भोला-सा बचपन और... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू
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[02 Nov 2009 03:51 AM]

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