जीवन का आधार
जब एक प्रेम का धागा जुड़ता है, दिल का कमल तब ही खिलता है देखता है खुदा भी आसमान से जमीन पर जब एक दिल दूसरे से बेपनाहा मोहब्बत करता है सुलगने लगता है तब धरती का सीना भी जब कोई आसमान बन के बाहो में पिघलता है लिखी जाती है तब एक दस्तान-ए -मोहब्बत तब कही...
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Nirbhay Jain
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[02 Nov 2009 03:29 AM]



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