इस धुंधली सुबह बसी है रात की खुशबू

राजू बिन्दास! थोड़ी खुशबू, थोड़ी खुनक, थोड़ी खुश्की और थोड़ी खामोशी. और कैसी होती है खुशनुमा सुबह. विंटर को वेलकम करने का इससे सुंदर तरीका और क्या हो सकता है. ऑटम तो आता ही है विंटर को वेलकम करने. उफ्, शरद ऋतु की ये शीतल चांदनी और मिस्टी मॉर्निंग दीवाना बना रही है... [पूरी पोस्ट]
writer rajiv
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[01 Nov 2009 23:35 PM]

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