अहंकार के बादल......
रुतबा शब्द आते ही सायास दिलो -दिमाग के किसी कोने में अहंकार के बादल घुमड़ - घुमड़ हवा के साथ - साथ गलबहियां शुरु कर देते हैं सार्थक विचार खुद को समेटना शुरू कर देते हैं ठीक वैसे ही जैसे कछुआ विपरीत समय में सही अवसर के इन्तजार में समेट लेता है अपने - आप...
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हेमन्त कुमार
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[01 Nov 2009 23:10 PM]



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