अहंकार के बादल......

कलरव रुतबा शब्द आते ही सायास दिलो -दिमाग के किसी कोने में अहंकार के बादल घुमड़ - घुमड़ हवा के साथ - साथ गलबहियां शुरु कर देते हैं सार्थक विचार खुद को समेटना शुरू कर देते हैं ठीक वैसे ही जैसे कछुआ विपरीत समय में सही अवसर के इन्तजार में समेट लेता है अपने - आप... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त कुमार
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
5
[01 Nov 2009 23:10 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix