संस्कार

प्रेरणा रामकृष्ण परमहंस अपने लोटे को प्रतिदिन मांजते थे । यह देख कर उनका एक शिष्य मन ही मन सोचता था कि इस तरह लोटा मांजने का अर्थ क्या हैं? आखिरकार जब उस से नहीं रहा गया तो वह उनसे पूछ बैठा । रामकृष्ण परमहंस ने से जवाब में हंस कर कहा,'' या द रखो कि हमें अपने... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेश शर्मा
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[01 Nov 2009 20:50 PM]

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