सकुबाई से सफाई घर की भी, दिल की भी
नाटक में आप जितने भी प्रयोग कर लें, पीरियड ड्रामा ले आएं, ड्रामे के माध्यम से आप राग रंग, नट भाव, उपमा, उपमान की बातें बताएं, सच तो यह है कि आम आदमी नाटक के उन्हीं हिस्सों से जुड़ पाता है, जिसके साथ वह अपना जीवन देख पाता है। पौराणिक आख्यानों में भी व...
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Vibha Rani
नादिरा बब्बर
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[01 Nov 2009 20:21 PM]



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