संतोषी भला कि महत्वाकांक्षी...?

टूटी-फूटी बचपन से यह सुनते आते हैं कि संतोष का फल मीठा होता है। अपने मन को हमेशा संतोष करने लिए तैयार करना चाहिए। बड़े-बुजुर्ग यही सिखाते रहे। लेकिन मुझे लगता है कि किसी के भीतर यदि इस आत्म संतोष की अधिकता है तो इसका अर्थ है अपने आप को एक बीमारी की दावत देना। प... [पूरी पोस्ट]
writer रचना त्रिपाठी
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[01 Nov 2009 18:42 PM]

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