मेरे साजन
तुम सच भी हो और सपना भी अजनबी भी हो और अपना भी तुम मेरे दिल के करीब भी हो और दूर भी तुम कायनात भी हो और खुदा की करामात भी हे मेरे साजन कहूँ तो क्या कहूँ ! करूँ तो क्या करूँ !...
[पूरी पोस्ट]
गुर्रमकोंडा नीरजा
14
0
0
0
0
[01 Nov 2009 07:20 AM]



Shuffle








