एक ही तत्व

सागरिका हम दोनों एक दूसरे से ऐसे अलग हुए जैसे पेड़ से पत्ते और मेघ से पानी जब हम मिले तो यह अहसास हुआ की हम अलग नहीं हैं हम एक ही तत्व हैं जैसे फूल और खुशबू जैसे सागर और लहरें जैसे सूरज और किरणें... [पूरी पोस्ट]
writer गुर्रमकोंडा नीरजा
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[01 Nov 2009 07:20 AM]

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