कौवा-बगुला संबाद : आगामी भागन कै भूमिका
राम राम भईया ! कभौ गद्य औ कभौ पद्य, साहित्य मा दुइनौ कै उपस्थिति हुवत है| वैसे तो संसकीरत मा पूरे साहित्य का काब्य कहा गा है | मुला आज के समय मा काब्य अउर गद्य मा विधागत अंतर साफ़ देखात है| मोर इरादा तौ इहै है कि दुइनौ विधन से आपन बात रखी| गद्य मा आप...
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अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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[01 Nov 2009 02:14 AM]



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