चाणक्य नीति-स्नेह करना दु:ख का मूल कारण (sneh dukh ka karan-chankya niti in hindi
यस्य स्नेहो भयं तस्य स्नेहो दुःखस्य भाजनम्। स्नेहमूलानि दुःखानि तानि त्यक्तवा वसेत्सुखम्।। हिंदी में भावार्थ- जहां स्नेह हैं वही दुःख है। स्नेह ही दुःख की उत्पत्ति का कारण है। स्नेह ही दुःख का मूल है। जिसने स्नेह को त्याग दिया वही सुखी रहता है। सत्यं...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[31 Oct 2009 21:49 PM]



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