जगह नहीं आंसू के लिए...
साथ देती ही क्यों हो, पल दो पल का मुझे, ख़्वाबों में कभी कभी, देने मुझे आंसुओं का साथ, क़यामत तक के लिए... समंदर रेत को हमने, है आंसुओं से कर दिया, आओ कभी जिंदगी में भी, निकल कर ख़्वाबों से, तुम भी देखने के लिए... आंसू की एक बूँद से पूछा, क...
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अम्बरीश अम्बुज
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[31 Oct 2009 16:46 PM]



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