परती परिकथा

प्रत्यक्षा उनके बीच उल्लास खत्म हो गया है । बावज़ूद, वो अब भी किसी मोह में डूबे बात करते हैं । चौंक चौंक कर हड़बड़ा कर किसी आवेग में एक दूसरे को तलाशते हैं । लेकिन बात शुरु करते ही , पहला शब्द बोलते ही लगता है , ओह क्या बात कहनी थी ? जेब में रेज़गारी टटोलने जैसी जु... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[31 Oct 2009 16:07 PM]

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