मुझे कुछ और कहना था...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! वो सुनता तो मैं कुछ कहता, मुझे कुछ और कहना था। वो पल को जो रुक जाता, मुझे कुछ और कहना था। कहाँ उसने सुनी मेरी, सुनी भी अनसुनी कर दी। उसे मालूम था इतना, मुझे कुछ और कहना था। रवां था प्यार नस-नस में, बहुत क़ुर्बत थी आपस में। उसे कुछ और सुनना था, मुझे कु... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम
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[31 Oct 2009 11:48 AM]

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