आगे बढ़ मर्दाना लिख
हमारे एक अज़ीज हैं शिवप्रताप सिंह जी , पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य (पढने और लिखने) में भी ख़ासा दख़ल रखते हैं आज उनसे बात हो रही थी मैंने इन दिनों अपने उदास रहने का जिक्र उनसे किया। उन्होंने अपनी एक रचना सुनते हुए मेरे हौसले को बढ़ाया । शिव ने यह रचना...
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आशेन्द्र सिंह
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[31 Oct 2009 04:36 AM]



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