फुरसत- सुभाष चन्द्र
मकरा जाल बुनैत अछि फुरसत मे ओ करैत अछि निढाल फुरसत मे कथी लेल पूछैत छथि वो हमरा सँ एहन-ओहन सवाल फुरसत मे कवि- सुभाष चन्द्र. सम्पादक, " कतेक रास बात " लोक नीक जकां देख लिअ हमरा अपना कें घर सँ निकालि फुरसत मे लूटि लिअए हमर परछाईं हमरा नहि त रहि जायत कच...
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सम्पादक: कतेक रास बात
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[30 Oct 2009 23:43 PM]



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