जीत आपकी ही है
हमारा जीवन क्या है? इसकी अलग-अलग विद्वानों ने अपने ढंग से व्याख्या की है। कुछ कहते है यह एक कभी न खत्म होने वाली यात्रा है और दूसरे इसे बाजार बताते है जहाँ हमारे गुण अवगुणों का मूल्यांकन होता है। ऐसे भी विद्वान है जो जीवन को नाटक कहते है। उनका मत है...
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सत्यनारायण भटनागर
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[30 Oct 2009 23:17 PM]



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