गजल
आप लोगों की दी हुई, मोहब्बत पर इठलाता हूँ। मैं इतने दिलों में रहता हूँ, कि घर का पता भूल जाता हूँ।। नहीं हुनर किसी में मेरे जैसा, मैं लोगों को ऊंगलियों पर नचाता हूँ।। कुछ लोग मुझे फरिश्ता कहते हैं, मैं नफरत के स्कूलों में मोहब्बत पढ़ाता हूँ।। खुशियों...
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Nirbhay Jain
सुमित "सुजान"
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[30 Oct 2009 14:55 PM]



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