जीना इसी का नाम है
कुछ बूंदें ओस की टपकीं टप से बिखर गयीं फ़ूलों की कोमल पंखुड़ियों पर बिना विचारे कि वहां उनका स्वागत करेंगे नुकीले बेदर्द कांटे जिनका काम ही है दर्द बांटना। पर क्या मतलब इससे दीवानी बूंदों को उन्होंने तो खुद को कुर्बान कर चार चांद लगाया फ़ूलों के सौन्दर्...
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JHAROKHA
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[30 Oct 2009 13:56 PM]



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