जनता में बदलता देश

समकालीन जनमत मेरा देश ४७ में जनता की तरह पैदा हुआ थाजिसे मैं प्यार नहीं करता थादया दिखाता था या फिर गोली मार देता थामैं इतना गतिशील था उस समयकि हर चेहरा मेरा ही चेहरा हो जाता थाजब भी कुछ बदलने की कोशिश करता-तबमैं गांधी हो जाता और देश हरिजनमैं नेहरु हो जाता और देश... [पूरी पोस्ट]
writer समकालीन जनमत
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[30 Oct 2009 05:27 AM]

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