मै अजीबो-गरीब तरीके से मरना चाहता हूँ
इतवार की सुबह वाकई ख़ास रही जब चाय की चुस्कियां और यशवंत भाई के वसीयतनामे पर चर्चा चल रही थी. बहुत दिन से बेरोजगार घूम रहा था.. सोचने के लिए कई दिन पहले एक मुद्दा सूझा था.."क्या है ऊपर वाले की लैंग्वेज".. तब से आज तक माथा-पच्ची करने की ज़ुरूरत नहीं हु...
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राहुल कुमार
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[30 Oct 2009 04:24 AM]



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