एक प्यार ही तो

अपनीबात... बड़ी छोटी उम्र में सौंदर्यबोध हो गया था। कोर्स के अलावा सबकुछ पढने -लिखने का शगल था। बीए कर रहा था उन्ही दिनों हिन्दुस्तान पटना (2 जनवरी 1997) के अंक में रमेश ऋतंभरा की कविता पढ़ी । मन को छूने वाली थी। कविता यहाँ प्रस्तुत है - एक प्यार ही तो एक दिन में... [पूरी पोस्ट]
writer आशेन्द्र सिंह
views
10
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
2
[30 Oct 2009 04:20 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix