चित्रलेखा, पाप और प्रेम
राजकिशोरभगवतीचरण वर्मा का उपन्यास ‘चित्रलेखा’ कई दृष्टियों से एक मोहक उपन्यास है। इसकी शुरुआत इस प्रश्न से होती है कि पाप क्या है और उत्तर यह निकलता है कि हम न पाप करते हैं और न पुण्य करते हैं, हम केवल वह करते हैं जो हमें करना पड़ता है। जाहिर है, सवाल...
[पूरी पोस्ट]
Geetashree
47
6
0
6
5
[30 Oct 2009 03:18 AM]



Shuffle








