इलाहाबाद की राष्ट्रीय संगोष्ठी के बाद...
यह पोस्ट सातवें आसमान से लिख रहा हूँ... कारण है आप सभी की जोरदार, शोरदार और बेजोड़दार प्रतिक्रियाओं की सतत् श्रृंखला। वाह, मुझे तो उड़न तश्तरी होने का इल्म हो रहा है... (आदरणीय समीर जी क्षमा याचना सहित) श्री विभूति नारायण राय जी से २३ अगस्त २००९ को...
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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[30 Oct 2009 00:41 AM]



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