रहीम के दोहे-मैंढक जब बोलें तो कोयल चुप हो जाती (koyal ki khamoshi-rahim ke dohe)
पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन। अब दादुर वक्ता भए, हम को पूछत कौन। कविवर रहीम कहते हैं कि जब वर्षा का मौसम आता है तब कोयल मौन धारण कर लेती है क्योंकि उस समय मैंढक बोलने लगते हैं। वह यह सोचकर खामोश हो जाती है कि अब इस टर्र टर्र की आवाज में उसकी बात...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[29 Oct 2009 22:07 PM]



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