देखा है............
मैंने दरख्तों पर सूखे पत्ते गिरने के बाद नई कलियों को फूटते हुए देखा है मैंने पतझड़ के बाद धरती को हरियाली की चादर ओढ़ते हुए देखा है मैंने अंधियारों के सायो को उजाले की किरण से टूटते हुए देखा है मैंने बर्बादी के मंजरों के बाद नए आशियानों को बसते हुए...
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Shobhna Choudhary
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[21 Jul 2009 14:18 PM]



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