बेबसी..............
मैं उस नदी का बेबस किनारा हूँ जो दूसरे किनारे से मिलने के लिए कसमसाता हूं बिना मिले अपने साथी से मैं दरिया से छूट मैं सागर में कही खो जाता हूं मैं उस दिए की नाज़ुक सी बाती हूं जो दुसरो को रौशनी से भर देती हूं पर कुछ पल जलने के बाद उसी दिए से निकाल दी...
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Shobhna Choudhary
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[18 Sep 2009 13:10 PM]



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