मैं बस अकेले ही चलना चाहती हूँ

Shobhna मैं हँसना चाहती थी मैं कुछ लम्हों को अपनी यादो में शामिल करना चाहती थी मैं कुछ खुशियों को अपने दामन में संभाल कर रखना चाहती थी मैं वो नदिया की चंचल धारा थी जो बिना रुके हँसते गुनगुनाते बहती जा रही थी जिंदगी के गमों के सायों को धता बताती जा रही थी लोग... [पूरी पोस्ट]
writer Shobhna Choudhary
views
11
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[22 Oct 2009 13:55 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix