खोजता था अपना नाम .............
खोजता था अपना नाम उसके हाथों में कहीं क्या लकीरें इश्क की , हाथ में होती नहीं हैं? सोचता था स्वप्न में ही उससे मिल आऊं कभी पर सुना है वो दीवानी आज कल सोती नहीं है अश्क बनकर बरस जाऊं उसकी आँखों से कभी मेरी किस्मत, मौन है वो, आजकल रोती नहीं है सी...
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योगेश स्वप्न
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[29 Oct 2009 12:54 PM]



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