छांव के पैबंद
खजूर, सीधे, तने हुये धरती के सीने पर या मुड़े हुये बेतरतीब अलसाये से जब भी मैनें देखा उन्हें उनींदे अधूरे ख्वाबों सा लगे आसमानी बुलंदी को छूने के पहले / ठिठके हुये हौंसले से जलती दुपहरी में छांव के पैबंद से लगे जब से, ख्वाब जागने लगे हैं रातों में बैच...
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मुकेश कुमार तिवारी
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[29 Oct 2009 10:15 AM]



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