छांव के पैबंद

कवितायन खजूर, सीधे, तने हुये धरती के सीने पर या मुड़े हुये बेतरतीब अलसाये से जब भी मैनें देखा उन्हें उनींदे अधूरे ख्वाबों सा लगे आसमानी बुलंदी को छूने के पहले / ठिठके हुये हौंसले से जलती दुपहरी में छांव के पैबंद से लगे जब से, ख्वाब जागने लगे हैं रातों में बैच... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
views
25
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
17
[29 Oct 2009 10:15 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix