मैं बेगुनाह हूँ.........
भाग- १ मैं कविता ............ऊँचे ख्वाब, ऊँची उडान भरने का जज्बा, सफलता की बुलंदियों को अपनी मुट्ठी में कैद करने की चाह, सुमंद्र की अथाह जल राशि को अपने आँचल में भर लेने की कोशिश और आसमान को अपनी बाहों में समां लेने का पागलपन......... ये है मेरा परिच...
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Shobhna Choudhary
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[29 Oct 2009 00:51 AM]



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