मेरे बिस्तर के सिरहाने.............
न पूछो क्यों, हम नींद में, हंसते हैं, और कभी रोते हैं, ख्वाब में अक्सर........, दर्द की यादों में, तो कभी, खुशियों की महफलों में होते हैं। यूं ही मिलते हैं हम, जमाने से मुलाकातों में, वर्ना तो मिलने में...
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PREETI BARTHWAL
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[28 Oct 2009 20:58 PM]



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