छिपा लो यूं दिल में प्यार मेरा
क्या हम जीवन में कुछ भी सहज और स्वाभाविक होते हैं? सबकुछ ओढ़ा-बिछाया सा न हो। बिलकुल सहज, जैसे बारिश की बूंदें, जैसे फूलों का खिलना, जैसे उत्तरी से दक्षिणी ध्रुव तक हर दौर और हर सभ्यता में एक खास उम्र में आकर हर लड़की और लड़के के मन में प्रेम का...
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मनीषा पांडे
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[28 Oct 2009 07:39 AM]



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