व्यर्थ की दौड़ से बचिए, आराम से चलिए
जीवन में कर्म का बहुत महत्व है। हम एक क्षण भी बिना कर्म किए रह ही नहीं सकते। बिना कर्म किए रहना ही एक सजा है। कर्म जीवन का यज्ञ है। कर्म के बिना हम जीवन यापन नहीं कर सकते। इसलिए गीता में कर्म योग को प्रमुख स्थान दिया गया है। कर्म का सिद्धांत बड़ा गहन...
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सत्यनारायण भटनागर
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[28 Oct 2009 01:52 AM]



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