प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

महावीर अधजल गगरी छलकत जाए - प्राण शर्मा तीन बार दसवीं में फ़ेल कमाल जी की बातें सुनते रहिये और बोर होते रहिये. दोस्तों से मिलते ही वे शुरू हो जाते हैं- “मेरे चाचा जी एम .ए. और पी.एच .डी थे. सरकारी विभाग में सीनिअर ऐडवाईज़र थे. पांच हजार रूपये उनकी मंथल... [पूरी पोस्ट]
writer महावीर

लघु कथाप्राण शर्मा

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[27 Oct 2009 19:16 PM]

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