ओसियान् में खरगोश

नई सोच ओसियान्स में दिखा वो खरगोश रगों में अब तक एक अजनबी सी रुमानियत पैदा कर रहा है। एक मासूम सी, बच्ची सी पर पर फिर भी प्रौढ़, परिपक्व सी है ये रुमानियत। बड़ा रुहानी सा होकर भी रुहानी भाव न होने सा कुछ, पर फील पूरा रुहानी, पूरा नशा लिए हुए। सात बजकर पैंता... [पूरी पोस्ट]
writer उमेश पंत

फिल्मों पर

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[27 Oct 2009 15:28 PM]

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