हाहाकार

Hindi short stories, poetry and blogs झोपड़िया की टूटी छत से टप-टप टपकता जल जीवन भिगोता, कँपकँपाता इमारतें बनानेवाला तन! फटे चिथड़ों में लिपटते रेशमी परिधान बनानेवाले पिचके पेट, अन्न को तरसते जग का पेट भरने वाले ! कूड़े के ढेर पर पलते कूड़ों का ढेर उठाने वाले घुटने पेट में गाड़,ठिठुरते नरम कं... [पूरी पोस्ट]
writer Veena

hindi poetry

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[27 Oct 2009 14:49 PM]

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