तेरी रुसवाई से, मेरी बेवफाई का इल्जाम अच्छा है

जीवन के पदचिन्ह यह मेरे दर्द का फ़साना, कुछ झूठा कुछ सच्चा है शब-ए-हिज्र की हैं बातें, तुम ही सुनते तो अच्छा है कहकर तो देखो कभी, परियों की बातें उनसे हर संजीदा दिल में, सहमता हुआ एक बच्चा है इसी बहाने पहचान हो गई दोस्त दुश्मनों की, भरी रईसी से, मेरा मुफलिसी हाल अच्छ... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

मैं

views
47
upvote
7
downvote
0
rating
7
comments
8
[27 Oct 2009 14:13 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix