तेरी रुसवाई से, मेरी बेवफाई का इल्जाम अच्छा है
यह मेरे दर्द का फ़साना, कुछ झूठा कुछ सच्चा है शब-ए-हिज्र की हैं बातें, तुम ही सुनते तो अच्छा है कहकर तो देखो कभी, परियों की बातें उनसे हर संजीदा दिल में, सहमता हुआ एक बच्चा है इसी बहाने पहचान हो गई दोस्त दुश्मनों की, भरी रईसी से, मेरा मुफलिसी हाल अच्छ...
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Sudhir (सुधीर)
मैं
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[27 Oct 2009 14:13 PM]



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