गुलज़ार जी की कुछ और त्रिवेनियाँ
इतने लोगों में, कह दो अपनी आँखों से इतना ऊंचा ना ऐसे बोला करें लोग मेरा नाम जान जाते हैं ! सारा दिन बैठा में हाथ में लेकर खाली कासा रात जो गुजरी चाँद की कौडी डाल गयी उसमे सूदखोर सूरज कल मुझसे ये भी ले जायेगा ! आओ जुबानें बाँट ले अब अपनी अपनी हम ना तु...
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Akanksha
त्रिवेणी
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[27 Oct 2009 11:07 AM]



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