सिलसिला ग़ज़ल का...
और इस तरह एक ग़ज़ल का सिलसिला, और पूरा हुआ... यार, सुना है अंबर ने सिर फोड़ लिया दीवारों से, आख़िर तुमने क्या कह डाला, सूरज, चांद, सितारों से. लफ़्ज़ों की लच्छेबाज़ी पर हमको कब विश्वास रहा, लेकिन आप कहां समझे थे, दिल की बात इशारों से. मन में पीड़ा, आ...
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aalok shrivastav
शायरी
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[27 Oct 2009 08:28 AM]



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