कि बन जाये आत्मा

गुलमोहर का फूल बहना नदी की तरह निरंतर, निर्विरोध और तीव्र वेग लिये कि बन जाये आत्मा एक नदी चंचल और मिटा दे अपना अस्तित्व मिलकर अपने इष्ट से । खिलना पुष्प की तरह चटख रंग, महक और सौंदर्य लिये कि बन जाये आत्मा एक पुष्प गुच्छ और कर दे अपना जीवन समर्पित अपने प्रिय के आं... [पूरी पोस्ट]
writer चंदन कुमार झा

महासागर

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[27 Oct 2009 07:42 AM]

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