इरादतन मैंने किया

अनुभूतियाँ इरादतन मैंने किया; इल्ज़ाम लेने दो मेरे गुनाहों को मेरा अब नाम लेने दो चलना अगर आता उफ़क भी पार कर लेता बैसाखियों को धड़कने तो थाम लेने दो झुक कर जरा सिर से हटा दो सख्त मिट्टी को इस बीज को भी इक नया आयाम लेने दो दुश्वार ना हो जाय, चलना दोपहर में कल इन... [पूरी पोस्ट]
writer प्रताप नारायण सिंह
views
19
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
5
[27 Oct 2009 06:29 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix