बिखरे सितारे.!१).एक वो भी दिवाली थी...! ...
क्यों हम किसी की या ख़ुद की ज़िंदगानी किसी के साथ साँझा करना चाहते हैं? क्यों एक दास्ताँ बयाँ करना चाहते हैं? हर किसी के अलाहिदा वजूहात हो सकते हैं...मैं यहाँ किस कारण आयी हूँ, ये बता दूँ.... एक ऐसी दास्ताँ सुनाने आयी हूँ, जो शायद आपको चौंका दे...हो स...
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kshama
आज़ादी
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[26 Aug 2009 15:17 PM]



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