बिखरे सितारे ३ ) वो दिन भी क्या दिन थे !

BIKHARE SITARE धीरे, धीरे चलती बैलगाडी, तकरीबन एक घंटा लगाके घर पहुँची...दादी उतरी...बहू की गोद से बच्ची को बाहों में भर लिया...दादा भी लपक के ताँगे से उतरे...दोनों ताँगों को हिदायत थी कि,एक आगे चलेगा,एक बैलगाडी के पीछे...आगे नही दौड़ना..! तांगे वालों को उनकी भेंट... [पूरी पोस्ट]
writer kshama

क्षमा

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[26 Sep 2009 11:47 AM]

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