आतंक कि शाम मांगता है ....!
कभी मस्जिद का तो कभी मंदिर का नाम मांगता है.. कागजी माया के लिए मुल्ला रहीम, पंडित राम मांगता है... जीवन का हर पल मर के काटती है वो गरीब माँ.... भूक से बिलखता बच्चा रोटी जब सरे आम मांगता है ... पड़ते है छाले चलते चलते, नौजवान क़दमों मैं.. कैसे हाथ जो...
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Kunaal
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[26 Oct 2009 16:58 PM]



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