आतंक कि शाम मांगता है ....!

कुनाल (सिफर) कभी मस्जिद का तो कभी मंदिर का नाम मांगता है.. कागजी माया के लिए मुल्ला रहीम, पंडित राम मांगता है... जीवन का हर पल मर के काटती है वो गरीब माँ.... भूक से बिलखता बच्चा रोटी जब सरे आम मांगता है ... पड़ते है छाले चलते चलते, नौजवान क़दमों मैं.. कैसे हाथ जो... [पूरी पोस्ट]
writer Kunaal
views
22
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[26 Oct 2009 16:58 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix