अक्टूबर का गीला दिन, किशोरी और हमारी वापिसी !!!
आज सुबह नींद खुली तो देखा कि झमाझम बरसात हो रही है। ११ बजे तक पडे ऊँघते रहे और तर्क दिया कि जब घडी का आविष्कार नहीं हुआ होगा तो लोग रोशनी देखकर ही उठते होंगे और अभी रोशनी से लग रहा है कि सुबह का ५ बजा है। जब आत्मा पर बोझ बढने लगा और भूख से पेट...
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Neeraj Rohilla
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[26 Oct 2009 14:47 PM]



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