चुनिन्दा तथ्यों को लिखने का रिवाज़ है
हम कितने ईमानदार होते हैं अक्सर...बायोडाटा, अपना प्रोफाइल और अन्या जानकारियां देते वक्त...। विस्वावा शिम्बोर्स्का की यह कविता यूं ही तो याद नहीं आ गई न...। खै़र पढि़ए, अनुवाद अशोक पांडे का है, हां वही कबाड़ख़ाना वाले। बायोडाटा लिखना क्या किया जाना...
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[26 Oct 2009 13:21 PM]



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