दोस्ती
आज मैंने अपने भगवान जी पर एक एहसान किया मन में फुदक आयी एक अनरगल इच्छा को भगवान जी से बिना कहे मन ही में खुरच खुरच कर , खिरच खिरच कर खत्म कर दिया ! शाम को रोज की बात चीत में यह सब उनसे कह खुश हुआ । रोज की तरह वे भी कुछ बोले नहीं बस थोड़ा सा मुस्कुराये...
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Aarjav
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[26 Oct 2009 13:11 PM]



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